संतो की शिक्षा

                   संतो की शिक्षा                

          


भारत भूमि प्राचीन काल से ही संतो की जन्मभूमि रही हैं यहाँ अनेक संतों ने जन्म लिया है संतों की  शिक्षा के  कारण प्राचीनकाल काल में भारतीय जनता बहुत धार्मिक हुआ करती थी सब एक दूसरे के दुखों को बैठा करते थे भगवान से सब डरा करते थे ही कार्य किया करते थे 

लेकिन वर्तमान में नकली संतों महंतो ने शास्त्र विरुद्ध साधना बता कर भोली जनता को गुमराह कर दिया जिससे लोग भगवान से दूर होते जा रहे हैं लोगों के दिलों से प्रेम भाव खत्म होकर राग देश बढ़ गया जिससे लड़ाई झगड़े एक-दूसरे को मार काट आदि जुर्म पनप गए किसी को नहीं देखते यह कौन है देखते हैं तो सिर्फ माया पैसा और अपना स्वार्थ यह सब ज्ञान के अभाव में हुआ है नकली संतों ने सिर्फ आडंबर कर कर दुनिया को बेकार रखा है इनको भोली भाली जनता को फंसा कर ठगी करने से काम है सिर्फ गले में बड़ी-बड़ी माला है सिर पर जटा और धूनी रमाने से संत नही बन जाते हैं
कबीर साहेब कहते हैं 
माला पैर हुए हैं मुक्ता षट दल उआ बाई बक्ता

पूर्ण संत की पहचान

वेद, गीताजी जी अति पवित्र सद ग्रंथों में प्रमाण मिलता है कि जब जब धर्म की हानि होती है वह अधर्म की वृद्धि होती है तथा वर्तमान में नकली संत महंत वह गुरुओं द्वारा भक्ति मार्ग के स्वरूप को बिगाड़ दिया गया होता है फिर परमेश्वर सोना कर या अपने परम ज्ञानी संत को भेजकर सच्चे ज्ञान के द्वारा धर्म की पुनर्स्थापना करता है विभक्ति मार्ग को शास्त्रों के अनुसार समझाता है उसकी पहचान होती है कि वर्तमान के धर्मगुरु उसके विरोध में खड़े होकर राजा व प्रजा को गुमराह करके उसके ऊपर अत्याचार करवाते हैं

1.   कबीर साहिब अपनी वाणी में कहते हैं ।

जो मम संत सत उपदेश दृढावै (बतावै),वे वा के संग सब राड़ बढ़ावै

अर्थ- जो मेरा संत सत भक्ति मार्ग को बताएगा उसके साथ सभी संत महंत झगड़ा करेंगे यह उसकी पहचान होगी
वर्तमान समय में संत रामपाल जी महाराज के साथ सभी नकली संत लड़ने को उतारू हो रहे हैं

2.  दूसरी पहचान गरीब दास जी महाराज की वाणी में 

सतगुरु के लक्षण कहूं, मधुरे बैन विनोद चार वेद षट शास्त्र, कहे 18 बोध

अर्थ- गरीब दास जी महाराज अपनी वाणी में पूर्ण संत की पहचान बता रहे हैं कि वह चारों वेदों और शास्त्रों अठारह पुराणों आदि सभी ग्रंथों का पूर्ण जानकार होगा अर्थात उनका सार निकालकर बताएगा

वर्तमान समय में पूरे विश्व में केवल संत रामपाल जी महाराज जी एक ऐसे संत हैं जिन्होंने शास्त्रों के पूर्ण ज्ञान को हमें समझाया है और सब भक्ति मार्ग बताया है

3. यजुर्वेद अध्याय 19 के मंत्र नंबर 2526 में लिखा है कि वेदों के अधूरे वाक्यों अर्थात सांकेतिक शब्दों व एक चौथाई श्लोकों को पूरा करके विस्तार से बताएगा व तीन समय की पूजा बताएगा, सुबह पूर्ण परमात्मा की पूजा दोपहर को विश्व के देवताओं का सत्कार व संध्या आरती अलग से बताएगा वह जगत का उपाय उपकारक संत होगा 


वर्तमान में आप देख सकते हो कि संत रामपाल जी महाराज ने पवित्र शास्त्रों के जो गलत अर्थ निकाले हुए थे उनका सही अर्थ समझा कर हमेशा ध्यान बताया है और हमें तीनो टाइम की सुबह का नित्य नियम दिन की असुर निकंदन रमैनी तथा शाम को संध्या आरती करना बताया है

इन सभी प्रमाणों से सिद्ध होता है कि संत रामपाल जी महाराज जी वह पूर्ण संत हैं जो हमें शास्त्रों के अनुकूल साधना बताते हैं

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