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संतो की शिक्षा

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                    संतो की शिक्षा                             भारत भूमि प्राचीन काल से ही संतो की जन्मभूमि रही हैं यहाँ अनेक संतों ने जन्म लिया है संतों की  शिक्षा के  कारण प्राचीनकाल काल में भारतीय जनता बहुत धार्मिक हुआ करती थी सब एक दूसरे के दुखों को बैठा करते थे भगवान से सब डरा करते थे ही कार्य किया करते थे  लेकिन वर्तमान में नकली संतों महंतो ने शास्त्र विरुद्ध साधना बता कर भोली जनता को गुमराह कर दिया जिससे लोग भगवान से दूर होते जा रहे हैं लोगों के दिलों से प्रेम भाव खत्म होकर राग देश बढ़ गया जिससे लड़ाई झगड़े एक-दूसरे को मार काट आदि जुर्म पनप गए किसी को नहीं देखते यह कौन है देखते हैं तो सिर्फ माया पैसा और अपना स्वार्थ यह सब ज्ञान के अभाव में हुआ है नकली संतों ने सिर्फ आडंबर कर कर दुनिया को बेकार रखा है इनको भोली भाली जनता को फंसा कर ठगी करने से काम है सिर्फ गले में बड़ी-बड़ी माला है सिर पर जटा और धूनी रमाने से संत नही बन जाते है...

संतो की शिक्षा

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                           संतो की शिक्षा मनुष्य जन्म में पूर्ण संत की शिक्षा ग्रहण करना बहुत जरूरी है क्योंकि वर्तमान समय में अनेकों अनेक  नकली धर्म पंथ चले हुए हैं और हमें जरूरत है पूर्ण संत की जो हमे सच्चा ज्ञान दे शास्त्रों के अनुसार ज्ञान दे किसी के झूठे ज्ञान से, शास्त्रों के विरुद्ध ज्ञान से हमें मोक्ष नहीं मिल सकता और गीता जी के अध्याय नंबर 4 के श्लोक नंबर 34 में लिखा हुआ है कि तुम तत्वदर्शी संत को खोजो और उनसे ज्ञान ग्रहण करके भक्ति करो तब तुम्हारा मोक्ष संभव है गीता जी के अध्याय नंबर 16 के श्लोक नंबर 23 वे 24 शास्त्र विधि को त्याग कर अपनी इच्छा से मन माना आचरण करते हैं उनको न तो सुख प्राप्त होता है न सिद्धि प्राप्त होती है उनकी गति यानी मुक्ति भी नहीं होती अर्थात तो वह साधना गलत है व्यर्थ है गीता अध्याय नंबर 3 के श्लोक नंबर 36 से 43 तक अर्जुन ने प्रश्न किया है कि हे भगवान यह ना चाहते हुए भी पाप आचरण कैसे करने लग जाता है गीता ज्ञान दाता ने 37 से 43  में उत्तर दिया है तीनो...